7 सितंबर को चांद की समतल सतह पर Simpelius N और Manzinus C क्रेटर्स के बीच लैंडिंग की थी, दुर्भाग्यवश लैंडिंग सफल नहीं रही।

चंद्रयान 2 मिशन पर पूरी दुनिया की नज़र थी। ये काफी समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। आपको बता दें कि चंद्रयान 2 भारत के लिए बहुत ही खास मिशन था क्योंकि अगर विक्रम लैंडर निश्चित की गयी जगह पर लैंड कर जाता तो भारत चंद्रमा के साउथ पोल पर पहुंचने वाला पहला देश होता।

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चंद्रयान 2 के तीन हिस्से थे। पहला ऑर्बिटर जो अभी भी चाँद के चक्कर लगा रहा है। दूसरा विक्रम लैंडर जिसे चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी और उसमे से उसका तीसरा हिस्सा रोवर जिसको विक्रम लैंडर से निकल कर चाँद की सतह पर उतरना था। विक्रम लैंडर के चंद्रमा पर लैंड करने के सिर्फ 2.1 किलोमीटर पहले इसरो का उससे संपर्क टूट गया और इसरो के वैज्ञानिक अभी तक लैंडर से संपर्क बनाने की कोशिश में जुटे हुए है।

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नासा के वैज्ञानिकों ने भी विक्रम लैंडर को ढूंढ़ने की काफी कोशिश कि। लगातार कोशिशों के बाद नासा के वैज्ञानिकों ने विक्रम लैंडर को ढूंढ़ने में असमर्थ रहे लेकिन उन्होंने ये ज़रूर पता लगाया है की विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग नही हो पाई है बल्कि उसकी हार्ड लैंडिंग हुई है। साथ ही कुछ तस्वीरें भी साझा कि है।

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नासा के वैज्ञानिकों ने ये पता लगाया है कि चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर की हार्ड लैंडिंग हुई, यह स्पष्ट है और साथ ही ये भी बताया है कि स्पेसक्राफ्ट किस लोकेशन पर लैंड हुआ था। ‘चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम ने 7 सितंबर को चांद की समतल सतह पर Simpelius N और Manzinus C क्रेटर्स के बीच लैंडिंग की थी। दुर्भाग्यवश लैंडिंग सफल नहीं रही और स्पेसक्राफ्ट की लोकेशन की घोषणा नहीं की गई।

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लैंडर इस वक़्त किस लोकेशन पर है यह अभी निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता, क्योकि नासा द्वारा साझा की गयी तस्वीरें केंद्र से 150 किलोमीटर दूरी से ली गई हैं। साथ ही वैज्ञानिकों ने ये भी कहा है की वे अक्टूबर में एक बार फिर कोशिश करेंगे। ये प्रयास सिर्फ अक्टूबर में ही इसलिए किया जाएगा क्योकि एलआरओ एक बार फिर लैंडिंग साइट के पास पहुंचने का प्रयास करेगा। 14 अक्टूबर को जब प्रकाश स्थिति अनुकूल होगी तो एक और कोशिश की जाएगी।

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