अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही संवैधानिक बेंच के मुखिया और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने दलीलों के लिए डेडलाइन तय कर दी है।

क्या सुलझेगा दशकों पुराना विवाद? क्या आएगा अब फैसला? क्या अक्टूबर में थम जाएगी बहस? क्या नवंबर बनेगा भारत के इतिहास का ऐतिहासिक महीना? यह वो सवाल है जो अब अयोध्या का जिक्र आते ही हर किसी की जुबां आ रहा है। आए भी क्यों ना अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में 26वें दिन की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई कुछ ऐसा कह गए कि इन सवालों को बस अपने आप जुबां पर आने का मौका मिल गया।

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा 18 अक्टूबर तक होगा फैसला

अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही संवैधानिक बेंच के मुखिया और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने दलीलों के लिए डेडलाइन तय कर दी है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने 18 अक्टूबर तक दलीलें पूरी करने की डेडलाइन तय की है।

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दलीलें पूरी करने के लिए डेडलाइन तय किए जाने से नवंबर तक फैसला आने की उम्मीद बढ़ गई है। हालाति मध्यस्थता की के रास्ते भी खुले रखें गए हैं। मध्यस्थता की कोशिशों पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इसे समानांतर रूप से जारी रखा जा सकता है पर इसके लिए सुनवाई को रोका नहीं जाएगा।

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दरअसल, अयोध्या भूमि विवाद की सुनवाई अगर 18 अक्टूबर तक पूरी हो जाती है तो सुप्रीम कोर्ट को जजमेंट लिखने में 1 महीने का समय लगेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि नवंबर महीने में कभी भी देश की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था के लिहाज से संवेदनशील इस मामले पर फैसला आ सकता है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में उनके रिटायरमेंट से पहले फैसला आने की संभावना बढ़ गई है। यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने हर दिन सुनवाई को एक घंटा बढ़ाने और यदि जरूरत हो तो शनिवार को भी सुनवाई किए जाने का सुझाव दिया है।

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