हमारें द्वारा बनाए गए, और प्रयोग किए गए कैमिकल्स से काफी नुकसान होता है, और कैमिकल्स से ओजोन की परत कम पतली हो रही है।

विश्व ओजोन दिवस हर साल पूरी दुनिया में 16 सितंबर को मनाया जाता है।।इस बार ओजोन दिवस की थीम 32 Years and Healing है। ओजोन दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य है की कम हो रही ओजोन परत  के बारें में लोगों को जागरूक करना है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का 32वीं वर्षगांठ भी मनाई जा रही है। इसे दुनिया का सफल पर्यावरण समझौता माना जाता है। आपको बतादें कि ओजोन परत एक अणुओं की  परत है जो वायुमंडल में पाई जाती है। हमारें शरीर को हानिकारक किरणों से बचाना और इसके प्रभाव से कैंसर जैसी कई खतरनाक बीमारियां हो सकती है।

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ओजोन की परत इन रेडिएशन को सोखकर हमारे जीवन की रक्षा करती है। दरअसल पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक अल्ट्रा वाइलट किरणों से बचाने का काम करती है। अगर ओजोन परत न हो तो हमारा जीवन अस्त वस्त हो जाएंगा। क्योंकि अल्ट्रा वाइलट किरणें अगर सीधा धरती पर पहुंचेंगी तो मनुष्य, पेड़-पौधों और जानवरों के लिए भी बेहद हानिकारक हो सकता है।।ऐसे में ओजोन परत की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। अब आप सोच रहे होगें ओजोन परत को कैसे बचाएंगें आपकी जानकारी के लिए बतादें कि हमारें द्वारा बनाए गए, और प्रयोग किए गए कैमिकल्स से काफी नुकसान होता है, और कैमिकल्स से ओजोन की परत कम पतली हो रही है।

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फैक्ट्री और उद्योगों से निकलने वाले कैमिकल्स हवा में फैलकर प्रदूषण फैला रहे हैं। बतादें कि क्यों मनाया जाता है ओजोन दिवस।दरअसल साल 1985 में सबसे पहले वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिक के ऊपर ओजोन परत में एक बड़े छेद की खोज की थी। फिर वैज्ञानिकों को पता चला कि इसकी जिम्मेदार क्लोरोफ़्लोरोकार्बन गैस है। जिसके बाद इस गैस के उपयोग को रोकने के लिए दुनियाभर के देशों में सहमति बनी और 16 सितंबर 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किया गया था। जिसके बाद से ओजोन परत के बचाव के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 1994 में 16 सितंबर की तारीख को ‘अंतरराष्ट्रीय ओजोन दिवस’ मनाने का ऐलान किया।।पहली बार विश्व ओजोन दिवस साल 1995 में मनाया गया था। जिसके बाद हर साल 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है।

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