सुप्रीम कोर्ट ने देश के नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता तैयार किए जाने पर बल दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने देश के नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता तैयार किए जाने पर बल दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अफसोस जताया कि सर्वोच्च अदालत के प्रोत्साहन के बाद भी इस उद्देश्य को हासिल करने का कोई प्रयास नहीं किया गया। न्यायालय ने कहा कि संविधान निर्माताओं को आशा और उम्मीद थी कि राज्य पूरे भारतीय सीमा क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित कराने की कोशिश करेगा, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

Image result for union civil code hd

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि गोवा एक बेहतरीन उदाहरण है जहां समान नागरिक संहिता है और धर्म की परवाह किए बिना सब पर लागू है। गोवा के मामले का जिक्र करते हुए कहा, “जिन मुस्लिम पुरुषों की शादियां गोवा में पंजीकृत हैं, वे बहुविवाह नहीं कर सकते। इसके अलावा इस्लाम के अनुयायियों के लिए भी मौखिक तलाक का कोई प्रावधान नहीं है। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि यह गौर करना दिलचस्प है कि राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों से जुड़े भाग चार में संविधान के अनुच्छेद 44 में निर्माताओं ने उम्मीद की थी कि राज्य पूरे भारत में समान नागरिक संहिता के लिए प्रयास करेगा लेकिन आज तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

Related image

पीठ ने कहा कि ये कानून तब तक लागू नहीं होते जब तक कि भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं हो और पुर्तगाली नागरिक संहिता भारतीय संसद के एक कानून के कारण गोवा में लागू है। पीठ ने कहा, इसलिए, पुर्तगाली कानून जो भले ही विदेशी मूल का हो, लेकिन वह भारतीय कानूनों का हिस्सा बना और सार यह है कि यह भारतीय कानून है। यह अब विदेशी कानून नहीं है। गोवा भारत का क्षेत्र है, गोवा के सभी लोग भारत के नागरिक हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here