यूँ तो पूरा भारत संविधान के हिसाब से ही चल रहा है, लेकिन क्या हो अगर कोई राज्य इसके मैंने से इंकार कर दे?

संविधान एक देश को व्यवस्थित तरीके से चलाने में बहुत ही मददगार साबित होता है। संविधान किसी भी देश का एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसके अनुकूल लोगों को संविधान के अनुसार अपने जीवन को व्यतीत करने का आधार मिलता है, और यही संविधान हमारे कार्यों के सभी मापदंडों को निर्धारित करता है।

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आज पूरा देश भारतीय संविधान के हिसाब से चल रहा है। भीमराव अंबेडकर द्वारा बना ये संविधान इसे सरकार ने 26 जनवरी 1950 को लागू किया था। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को ही संविधान का जनक कहा जाता है। उन्होंने समाज में चल रही पुरानी प्रथाओं को मिटाने, ऊंच-नीच को खत्म करने, जातिवाद को खत्म करने और बराबरी के अधिकार के लिए संविधान लिखा था।

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Image result for constitution of indiaयूँ तो पूरा भारत संविधान के हिसाब से ही चल रहा है, लेकिन क्या हो अगर कोई राज्य इसके मैंने से इंकार कर दे? कुछ राज्य ऐसे भी हैं जिनमें संविधान को पूरी तरह से नहीं माना जाता है या यूं कहा जाए कि उनका संविधान कुछ हद तक भारतीय संविधान से अलग है। उनमें से ही एक राज्य जम्मू-कश्मीर भी था। जिसे देखते हुए मोदी सरकार ने हाल ही में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया।

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जानकारी के लिए आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति वार्ता की पहल पूर्वोत्तर से की थी। लेकिन उनकी इस पहल को बड़ा झटका लगा है कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागालैंड के राज्यपाल रवि को शांति वार्ता को जल्दी संपन्न कराने का आदेश दिया था। लेकिन नागालैंड के मुख्य वार्ताकार संगठन एनएससीएन (IN) ने भारत के संविधान को मानने से बिल्कुल मना कर दिया है। जानकारी के लिए बता दें कि भारत सरकार 1997 से ही नागालैंड मुद्दों को लेकर एनएससीएन से बातचीत कर रही है।
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