कहानी दरिंदगी और वहशीपन की जिसने पूरा विश्व-पटल हिला कर रख दिया।

11 सितंबर एक ऐसी तारीख जो इतिहास के पन्नों मे आँसुओ के साथ दर्ज होकर रह गई है। 18 साल बीत जाने के बाद भी 9/11 का दिन आज भी उसी तबाही की याद दिलाता है। आँखों के सामने आज भी वही मंज़र घूम जाता है जब 4 विमान जान बूझकर अमरीका में तबाही और दहशत फैलाने के लिए उड़ाए गए थे और जिसमें जीवित कोई भी नही बचा था उसमें। निर्दोष और मासूम जनता ने इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाई। इस वहशीपन से पूरा विश्व थर्रा उठा था। एक विकृत मानसिकता का भयानक कृत्य था ये जिसमें विमानो को मिसाइल की तरह इस्तेमाल करके अमरीका को लगभग 10 अरब से ऊपर का तो आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया और उससे भी ज्यादा मौत का जो वीभत्स खेल खेला गया वो भूल पाना नामुमकिन है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि 11 सितम्बर 2001 को अमरीका पर एक जानलेवा हमला किया गया था जो अल-कायदा दारा किए गए आत्मघाती हमलों की एक श्रंखला थी। अल-कायदा के 19 आतंकियों ने उसी दिन सवेरे चार कामर्शियल यात्री जेट वायुयानों का अपहरण कर लिया था। ये विमान वाशिंटन डी.सी से सैन फ्रांसिस्को तथा लॉस एंजिल्स जा रहे थे। इन आतंकवादियों ने जानबूझकर 4 में से दो विमानों को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, न्यूयॉर्क शहर के ट्विन टावर्स के साथ टकरा दिया और तीसरे विमान को वाशिंगटन डी.सी. के बाहर, आर्लिंगटन, वर्जीनिया में पेंटागन में टकरा दिया। जबकि चौथे और आखिरी विमान पर कुछ यात्रियों एवं उड़ान चालक दल द्वारा नियंत्रण कर लिया गया था, लेकिन इस प्रयास के बावजूद विमान ग्रामीण पेंसिल्वेनिया में शैंक्सविले के पास एक खेत में जा टकराया।

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इस आत्मघाती हमले में लगभग 3000 निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवा दी और आज भी हम सिर्फ उस मनहूस मंज़र पर केवल दुःख और अफसोस ही जता सकते हैं। आज उन सब को हमारी ओर से भाव-भीनी श्रद्धांजलि जिन्होने इस वीभत्स हादसे में अपनी जान गंवाई।

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