बात करें यदि बप्पा के मनपसंद भोग की तो मोदक का नाम सर्वोपरि है। महाराष्ट्र में मोदक विभिन्न प्रकार के बनते हैं ।

गणेश चतुर्थी हिंदुओं का एक बड़ा तयौहार है। माना जाता है कि गणेश जी का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन मध्याह्न में गणपती स्थापना की जाती है। साथ ही ये मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा देखना निषेध है। गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक स्वरूप एक-एक सुपारी भी रखी जाती है। कल यानि कि 2 सितंबर को गणेश चतुर्शी थी, जिसका आरंभ मूर्ति स्थापना से हो चुका है। महराष्ट्र में गणपति उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। आम आदमी से लेकर ख़ास सेलीब्रिटीज तक मूर्ति लाकर स्थापना करते हैं। सड़कों पर जगह-जगह लोगों को ढ़ोल-मंजीरे के साथ बप्पा को लाते देखा जा सकता है।

आखिर क्यूं मनाई जाती है गणेश चतुर्थी?

कुछ मोदक हो जाय, चलिए इस गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं असली मोदक

बात करें यदि बप्पा के मनपसंद भोग की तो मोदक का नाम सर्वोपरि है। महाराष्ट्र में मोदक विभिन्न प्रकार के बनते हैं पर हम आज आपको उसकी एक वैरइटी के बनाने की विधि बताएँगे जोकि बहुत ही आसान है। गणेश जी का प्रिय व्यंजन मोदक को बनाने में लागने वाली आवश्यक सामाग्री:-

·         चावल का आटा – 2 कप

·         गुड़ – 1 .5 कप (बारीक तोड़ा हुआ )

·         कच्चा नारियल –
2 कप ( बारीक कद्दूकस किया हुआ )

·         काजू – 4 टेबल स्पून ( छोटे छोटे टुकड़ों में काट लीजिये )

·         किशमिश – 2-3 टेबल स्पून

·         खसखस – 1 टेबल स्पून ( गरम कढ़ाई में डालकर हल्का सा रोस्ट कर लीजिये)

·         इलाइची – 5 -6( छील कर कूट लीजिये )

·         घी – 1 टेबल स्पून

·         नमक – आधा छोटी चम्मच

बनाने की विधि

कुछ मोदक हो जाय, चलिए इस गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं असली मोदक
कढ़ाई में गुड़ और कद्दूकस किया हुआ नारियल डालकर गरम होने रखे। ध्यान रहे कि इसे धीरे-धीरे चमचे से मीडियम आंच पर तब तक चलाते रहना है जब तक गुड़ और नारियल का गाढ़ा मिश्रण न तैयार हो जाए।

इस मिश्रण में काजू,  किशमिश, खसखस और इलाइची मिला दें। मोदक के अंदर की फिलिंग यानि की पिट्ठी तैयार है। एक पैन में 2 कप पानी और 1छोटा चम्मच घी डाल कर गरम करने रखिये।

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पानी में उबाल आते ही गैस बन्द कर दीजिये। फिर इसमें चावल का आटा और नमक डाल कर चमचे से चला कर अच्छी तरह मिला लीजिये। मिला लेने के बाद इस मिश्रण को 5 से 10 मिनिट तक ढक कर रख दीजिये।

फिर इस चावल के आटे को दूसरे बर्तन में निकाल कर हाथ से नरम गूथ लें। यदि आटा सख्त लगे तो 1 से 2 टेबल स्पून पानी और डाल सकते हैं।

अब थोड़ा  घी हाथों में लगाकर आटे को तब तक मलें जब तक कि आटा नरम न हो जाय। फिर  इस आटे को साफ कपड़े या मलमल के कपड़े से ढक कर रखें।

लालबागचा राजा इस बार अनोखे अंदाज़ में, पब्लिक में उत्सुकता…

कुछ मोदक हो जाय, चलिए इस गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं असली मोदकहथेली पर घी की चिकनाई लगाएँ और गूथे हुये आटे से एक छोटी लोई निकाल कर हथेली पर रखें और दूसरे हाथ के अँगूठे और उंगलियों से उसे किनारे पतला करते हुये बढ़ा लीजिये। उंगलियों से थोड़ा गड्डा करें और इसमें छोटा चम्मच  तैयार मिश्रण रखें।

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अँगूठे और अँगुलियों की सहायता मोड़ डालते हुये ऊपर की तरफ चोटी का आकार देते हुये बन्द कर दीजिये। मोदक साँचे का भी प्रयोग कर सकते हैं मिश्रण भर के। सारे मोदक इसी तरह तैयार कर लीजिये।

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अंतिम चरण में बस एक बड़े बर्तन में 2 गिलास पानी उबलने रखिए। साथ में जाली स्टैंड के ऊपर चलनी में मोदक उस बरतन में रखिए जिसमें पानी उबल रहा है। अब इसे ढँक कर थोड़ी देर स्टीम में पका लीजिये।

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आपके मोदक तैयार हैं। बस देर किस बात की है, प्लेट में निकालिए और बप्पा को भोग लगाइये।

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