UNSC में भारत की बड़ी जीत, लेकिन आगे हैं ये चुनौतियाँ…

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UNSC में भारत की बड़ी जीत, लेकिन आगे हैं ये चुनौतियाँ...

भारत की कूटनीति ने चीन की कोशिशों को नाकाम कर दिया।

मोदी सरकार के जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा खत्म करने के बाद से ही पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीय-करण करने में जुटा हुआ है। जिसमें उसे चीन का भरपूर साथ मिल रहा है। हालांकि, यूएस और फ्रांस ने भारत का साथ देते हुए कश्मीर को भारत का आंतरिक मुद्दा कहा है, जिससे न संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में औपचारिक चर्चा का प्रस्ताव पेश हो सका और न ही भारत के विरोध में कोई बयान आया।

UNSC में भारत की बड़ी जीत, लेकिन आगे हैं ये चुनौतियाँ...

शीत-युद्ध के वक्त से यूएनएससी में कश्मीर मुद्दे पर भारत का साथ देते आए रूस ने साफ कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सारे विवाद द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझाने चाहिए। वहीं, ब्रिटेन चीनी रुख की तरफ झुकते हुए यूएनएससी की तरफ से कश्मीर पर बयान जारी करने की मांग कर रहा था।

UNSC में भारत की बड़ी जीत, लेकिन आगे हैं ये चुनौतियाँ...

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सामूहिक राय भारत के ही पक्ष में रही  है, लेकिन भारत के सामने कूटनीतिक चुनौतियाँ पूरी तरह से खत्म नहीं हुई हैं। नई दिल्ली इस्लामाबाद के यूएनएससी में राजनीतिक दावे को तो बड़ी आसानी से खारिज कर सकता है लेकिन इस्लामाबाद के चीन की मदद से यूएनएससी में बार-बार कश्मीर मुद्दा उठाने के इरादे को किसी भी सूरत में नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता है। अगली बार यूएनएससी में कश्मीर मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है, यह वहां के ज़मीनी हालात पर भी काफी कुछ निर्भर कर सकता है।

बता दे, भारत के सामने पहली चुनौती नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की बहस को लेकर भारत की स्थिति को मजबूत करना है। न्यूयॉर्क/लंदन के पत्रकार, ऐक्टिविस्ट, पाकिस्तानी स्टेट एजेंट लगातार कश्मीर में मानवाधिकार को लेकर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं और प्रोपेगैंडा फैला रहे हैं।

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