दिल्ली में स्थित अटल जी की स्मृति-स्थल ‘सदैव अटल’ पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम राजनीतिक हस्तियों ने अटल जी को श्रद्धांजलि दी।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की आज पहली पुण्यतिथि है। जिसके चलते पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। दिल्ली में स्थित अटल जी की स्मृति-स्थल ‘सदैव अटल’ पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम राजनीतिक हस्तियों ने अटल जी को श्रद्धांजलि दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले महा-मिशन के बारे में लाल किले से ऐलान किया, जाने क्या कहा…

सदैव अटल: 'हार नहीं मानूंगा,'रार नहीं ठानूंगा' पहली पुण्यतिथि पर अटल जी को श्रद्धांजलि

आपको बता दें कि 16 अगस्त 2018 को लंबी बीमारी के चलते अटल जी का निधन हो गया था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक कुशल वक्ता और अच्छे व्यक्तित्व के इंसान थे। उनके विपक्षी भी उन्हें आदर की नजर से ही देखते थे। जब अटल जी के नेतृत्व में देश परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना था। उस समय भी वो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तारीफ करना नहीं भूले थे। अटल जी न सिर्फ कद्दावर नेता और कुशल वक्ता थे बल्कि एक शानदार कवि भी थे। अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि पर आपको उनके द्वारा लिखी कुछ ऐसी कवितायों से रु-ब-रु करवाते हैं जिन्होंने अटल जी को हमेशा के लिए अजर अमर कर दिया।

लाल किले से दिए गए मोदी भाषण पर क्या बोलीं मायावती, जानिए…

1: कदम मिलाकर चलना होगा

सदैव अटल : 'हार नहीं मानूंगा,'रार नहीं ठानूंगा' पहली पुण्यतिथि पर अटल जी को श्रद्धांजलि

बाधाएं आती हैं आएं

घिरें प्रलय की घोर घटाएं,

पावों के नीचे अंगारे,

सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,

निज हाथों में हंसते-हंसते,

आग लगाकर जलना होगा.

कदम मिलाकर चलना होगा.

हास्य-रूदन में, तूफानों में,

अगर असंख्यक बलिदानों में,

उद्यानों में, वीरानों में,

अपमानों में, सम्मानों में,

उन्नत मस्तक, उभरा सीना,

पीड़ाओं में पलना होगा.

कदम मिलाकर चलना होगा.

उजियारे में, अंधकार में,

कल कहार में, बीच धार में,

घोर घृणा में, पूत प्यार में,

क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,

जीवन के शत-शत आकर्षक,

अरमानों को ढलना होगा.

कदम मिलाकर चलना होगा.

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,

प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,

सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,

असफल, सफल समान मनोरथ,

सब कुछ देकर कुछ न मांगते,

पावस बनकर ढलना होगा,

कदम मिलाकर चलना होगा,

कुछ कांटों से सज्जित जीवन,

प्रखर प्यार से वंचित यौवन,

नीरवता से मुखरित मधुबन,

परहित अर्पित अपना तन-मन,

जीवन को शत-शत आहुति में,

जलना होगा, गलना होगा,

कदम मिलाकर चलना होगा.

  1. दो अनुभूतियांसदैव अटल : 'हार नहीं मानूंगा,'रार नहीं ठानूंगा' पहली पुण्यतिथि पर अटल जी को श्रद्धांजलि

पहली अनुभूति

बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं

टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूं

गीत नहीं गाता हूं

लगी कुछ ऐसी नज़र बिखरा शीशे सा शहर

अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूं

गीत नहीं गाता हूं

पीठ मे छुरी सा चांद, राहू गया रेखा फांद

मुक्ति के क्षणों में बार बार बंध जाता हूं

गीत नहीं गाता हूं

दूसरी अनुभूति

गीत नया गाता हूं

टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर

पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर

झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात

प्राची में अरुणिम की रेख देख पता हूं

गीत नया गाता हूं

टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी

अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी

हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा,

काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं

गीत नया गाता हूं.

3.एक बरस बीत गया

सदैव अटल : 'हार नहीं मानूंगा,'रार नहीं ठानूंगा' पहली पुण्यतिथि पर अटल जी को श्रद्धांजलि

झुलासाता जेठ मास

शरद चांदनी उदास

सिसकी भरते सावन का

अंतर्घट रीत गया

एक बरस बीत गया

सीकचों मे सिमटा जग

किंतु विकल प्राण विहग

धरती से अम्बर तक

गूंज मुक्ति गीत गया

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here