मुख्तार अंसारी को सता रहा मौत का डर, सुरक्षा पर कोर्ट ने सुना दिया ये फैसला

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मुख्तार अंसारी

पूर्वांचल के बाहूबली माने जाने वाले मुख्तार अंसारी इस समय बांदा जेल में बंद हैं। कुछ समय पहले उन्होंने रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा, आईजी एसटीएफ अमिताभ यश तथा माफिया डान बृजेश सिंह पर अपनी हत्या का षडयंत्र रचने की कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी और कोर्ट से अपनी सुरक्षा मांगी थी। जिसे विशेष कोर्ट ने खारिज कर दिया।

यह आदेश विशेष कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने बंदी के अधिवक्ता, शासन की ओर से राजेश गुप्ता, वीरेन्द्र सिंह, राधा कृष्ण मिश्र तथा हरिओंकार सिंह के तर्कों को सुनकर दिया।

मुख्तार अंसारी

कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि चूंकि बंदी ने पेशी के दौरान सुरक्षा मांगी है। इसलिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था दी जाए। कोर्ट ने बंदी को भी निर्देश दिया सुरक्षा का जिम्मा राज्य सरकार का है इसलिए संबंधित अधिकारी को अर्जी पेश करें। कोर्ट ने बंदी की कोर्ट में पेशी के संदर्भ में कहा कि कानूनी रूप से आवश्यकता पड़ने पर तलब किया जा सकेगा।

हालांकि पहले भी मुख्तार अंसारी की हत्या की साजिश रची जा चुकी है। 2014 में ब्रजेश सिंह ने मुख्तार अंसारी को मारने के लिए लंबू शर्मा को 6 करोड़ रुपये दिये थे जिसका खुलासा लंबू शर्मा ने गिरफ्तारी के बाद किया था।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जेल में मुख्तार अंसारी की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। सुपारी के खुलासे के बाद पूर्वांचल में यूपी पुलिस क्राइम ब्रांच और स्पेशल टास्क फोर्स ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। अभी भी पेशी पर या विधानसभा सत्र के लिए जाते समय मुख्तार की सुरक्षा बहुत कड़ी रखी जाती है।

बता दें कि मुख्तार अंसारी का जन्म यूपी के गाजीपुर जिले में हुआ था। उनके दादा मुख्तार अहमद अंसारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। जबकि उनके पिता एक कम्यूनिस्ट नेता थे।

राजनीति मुख्तार अंसारी को विरासत में मिली। किशोरवस्था से ही मुख्तार निडर और दबंग थे। उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा और सियासी राह पर चल पड़े।

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