जस्टिस पिनाकी चंद्र बने देश के पहले लोकपाल, राष्ट्रपति ने दिलाई शपथ

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Lokpal- Justice pinaki

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष भारत के पहले लोकपाल बन गए हैं। जस्टिस पिनाकी ने देश के पहले लोकपाल के तौर पर शपथ ले ली है। आम चुनावों से ठीक पहले लोकपाल की नियुक्ति को लेकर काफी राजनीतिव विवाद भी हुआ।

जस्टिस घोष को प्रेजिडेंट रामनाथ कोविंद ने पद की शपथ दिलाई। इस मौके पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीफ जस्टिस रंजन गोगोई भी मौजूद थे। जस्टिस घोष इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं। जस्टिस घोष वर्तमान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी हैं और मानवाधिकार कानूनों के जानकार के तौर पर उन्हें माना जाता है।

जस्टिस पीसी घोष को मानवाधिकार कानूनों पर उनकी बेहतरीन समझ और विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। जस्टिस घोष उच्चतम न्यायालय के जज रह चुके हैं। वह आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे हैं। वह अपने दिए गए फैसलों में मानवाधिकारों की रक्षा की बात बार-बार करते थे। वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी हैं।

बता दें कि लोकपाल भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाली संस्था है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पिनाकी घोष को मानवधिकार मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। जस्टिस घोष के अलावा लोकपाल में सदस्यों के तौर पर जस्टिस दिलीप बी. भोंसले, जस्टिस प्रदीप कुमार मोहंती, जस्टिस अभिलाषा कुमारी, जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी होंगे।

न्यायिक सदस्यों के साथ ही कमिटी में 4 अन्य सदस्यों के तौर पर दिनेश कुमार जैन, अर्चना रामसुंदरम, महेंद्र सिंह और डॉक्टर इंद्रजीत प्रसाद गौतम भी शामिल किए गए हैं। इन नियुक्तियों की सिफारिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत चयन समिति ने की थी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उसे मंजूरी दी थी।

जस्टिस घोष के अहम फैसले  

अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस मामले में जस्टिस रोहिंग्टन के साथ पीठ में रहते हुए निचली अदालत को भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह और बाकी नेताओं पर आपराधिक साजिश की धारा के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।

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