‘दांडी मार्च’ के 89 साल हुए पूरे, पीएम मोदी ने प्रार्थना कर किया बापू को याद

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‘दांडी मार्च’ के 89 साल हुए पूरे, पीएम मोदी ने प्रार्थना कर किया बापू को याद -AB STAR NEWS

12 मार्च इतिहास के पन्नों में ये तारीख सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। आज ही के दिन साल 1930 में अंग्रेजों के नमक कानून को तोड़कर ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी थी। वहीं सियासी गलियारों में भी आज डांडी मार्च की 89वीं वर्षगांठ की धूम देखने को मिल रही है। जहां आज कांग्रेस ने साबरमती आश्रम पहुंचकर प्रार्थना सभा में शिरकत की और बापू को याद किया।

दरअसल कांग्रेस के दिग्गज नेता गुजरात में सीडब्ल्यूसी मीटींग कर रहे हैं। ऐसे में मीटींग से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी समेत दिग्गज कांग्रेस नेताओं के साथ साबरमती आश्रम पहुंचे और प्रार्थना सभा में शिरकत कर बापू को याद किया..वहीं कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से एक वीडियो भी ट्वीट की गई । साथ ही ट्वीट किया गया है कि, “आज महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुई दांडीमार्च की वर्षगांठ है, जिसने स्वतंत्रता के लिए भारत के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, यह मार्च नमक पर कठोर और दमनकारी ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ एक अहिंसक विरोध था” ।

वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी आज के दिन को याद किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, “जब एक मुट्ठी नमक ने अंग्रेजी साम्राज्य को हिला दिया” । साथ ही पीएम मोदी ने एक ब्लॉग भी शेयर किया है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने बापू के बहाने कांग्रेस पर निशाना साधते नजर आए। ब्लॉग में पीएम मोदी ने लिखा है कि, “बापू ने कहा था, …मेरे लिए भारत की असली आजादी वो है, जब देशवासियों में भाईचारे की अटूट भावना हो, गांधी जी ने हमेशा अपने कार्यों के माध्यम से ये संदेश दिया कि असमानता और जाति विभाजन उन्हें किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। दुख की बात है कि कांग्रेस ने समाज को विभाजित करने में कभी संकोच नहीं किया। सबसे भयानक जातिगत दंगे और दलितों के नरसंहार की घटनाएं कांग्रेस के शासन में ही हुई हैं ।

दरअसल साल 1930 में अंग्रेजों ने नमक के उत्पादन और बेचने पर भारी मात्रा में टैक्स लगा दिया था जिसकी वजह से नमक की कीमत कई गुना बढ़ गई थी, और नमक गरीबों की पहुंच से दूर हो रहा था। अंग्रेजों के इसी नमक कानून के खिलाफ महात्मा गांधी ने 12 मार्च से 6 अप्रैल 1930 तक साबरमती से दांडी तक पैदल यात्रा निकाली थी जिसे दांडी मार्च के नाम से जाना जाता है ।

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